जिनेवा: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की 79वीं ‘विश्व स्वास्थ्य सभा’ (World Health Assembly) 23 मई 2026 को जिनेवा में संपन्न हो गई। समापन सत्र को संबोधित करते हुए WHO के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अदनोम घेब्रेयेसस ने वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने के लिए बहुपक्षवाद (Multilateralism) और एकजुटता पर विशेष बल दिया। उन्होंने सदस्य देशों से आग्रह किया कि वे कोविड-19 महामारी के अनुभवों से सीख लेते हुए आगामी महामारी समझौते के ‘पैथोजन एक्सेस एंड बेनिफिट-शेयरिंग’ (PABS) एनेक्स को जल्द से जल्द अंतिम रूप दें।
डॉ. टेड्रोस ने डोमिनिकन गणराज्य की एक कहावत का उल्लेख करते हुए कहा, “De poquito a poquito se llega lejos” (अर्थात: धीरे-धीरे और कदम-दर-कदम चलकर ही हम दूर तक जाते हैं)। उन्होंने कहा कि भले ही इस एक सप्ताह में दुनिया की हर स्वास्थ्य समस्या का समाधान नहीं हुआ है, लेकिन हर मोर्चे पर वैश्विक नेताओं ने एक महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ाया है।
प्रमुख स्वास्थ्य प्रस्तावों को मिली मंजूरी
79वीं विश्व स्वास्थ्य सभा के दौरान सदस्य देशों ने कई महत्वपूर्ण और गंभीर स्वास्थ्य मुद्दों पर ऐतिहासिक प्रस्तावों और निर्णयों को मंजूरी दी। इनमें शामिल हैं:
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डायग्नोस्टिक इमेजिंग और रेडिएशन सुरक्षा
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इमरजेंसी, क्रिटिकल और ऑपरेटिव केयर (आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं)
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हीमोफीलिया, स्ट्रोक और अन्य रक्त विकार
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तपेदिक (Tuberculosis – TB) और नेग्लेक्टेड ट्रॉपिकल डिजीज (NTDs)
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प्रिसिजन मेडिसिन और ऑर्गन ट्रांसप्लांटेशन (अंग प्रत्यारोपण)
इसके साथ ही, वैश्विक स्वास्थ्य ढांचे (Global Health Architecture) में सुधार के लिए सदस्य देशों के नेतृत्व और डब्ल्यूएचओ की मेजबानी में एक संयुक्त प्रक्रिया शुरू करने पर भी सहमति बनी है।
“महामारी समझौता” और PABS एनेक्स पर जोर
डॉ. टेड्रोस ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि पिछले साल महामारी समझौते (Pandemic Agreement) को अपनाना एक ऐतिहासिक उपलब्धि थी, लेकिन जब तक इसके अंतिम हिस्से—PABS एनेक्स—को पूरा नहीं किया जाता, तब तक दुनिया अगली महामारी का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार नहीं है। वर्तमान में अफ्रीका और अन्य हिस्सों में पैर पसार रहे इबोला (Ebola) और हंटावायरस (Hantavirus) के प्रकोप का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि यह स्थितियां हमें याद दिलाती हैं कि इस वैश्विक समझौते को अंतिम रूप देना कितना आवश्यक और तात्कालिक है।
स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ के बयान को दोहराते हुए डॉ. टेड्रोस ने कहा, “हम अपनी सीमाओं के भीतर तब तक स्वास्थ्य की रक्षा नहीं कर सकते, जब तक हम सीमाओं के बाहर इसकी रक्षा करने में सक्षम न हों, क्योंकि वायरस किसी सीमा, झंडे या पासपोर्ट को नहीं समझते।”
कठिन वैश्विक परिस्थितियों के बीच एकजुटता
यह स्वास्थ्य सभा ऐसे समय में आयोजित की गई जब दुनिया के कई देश युद्ध, संघर्ष, राजनीतिक विभाजन और सीमित संसाधनों की चुनौतियों से जूझ रहे हैं। डॉ. टेड्रोस ने कहा कि बहुपक्षवाद का अर्थ कठिनाइयों को नजरअंदाज करना नहीं, बल्कि मतभेदों से ऊपर उठकर स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना है। उन्होंने सभी देशों के राजदूतों, स्वास्थ्य मंत्रियों और तकनीकी विशेषज्ञों की सराहना की, जिन्होंने आपसी मतभेदों को भुलाकर आम सहमति से फैसले लिए।
अंत में, उन्होंने डब्ल्यूएचओ को आर्थिक रूप से अधिक सुदृढ़, स्वतंत्र और प्रभावी बनाने की दिशा में निरंतर सुधार जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई और सदस्य देशों से अपनी निर्धारित आर्थिक भागीदारी (Assessed Contributions) को समय पर स्वीकृत करने की अपील की, ताकि सभी के लिए स्वास्थ्य के अधिकार (Health for All) को सुनिश्चित किया जा सके।
ଜେନେଭାରେ ଶେଷ ହେଲା ୭୯ତମ ବିଶ୍ୱ ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ ସମ୍ମିଳନୀ, ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ ସୁରକ୍ଷାକୁ ମିଳିଲା ନୂଆ ଦିଗ
ଜେନେଭା (୨୪/୦୫): ବିଶ୍ୱ ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ ସଂଗଠନ (WHO) ପକ୍ଷରୁ ଆୟୋଜିତ ୭୯ତମ ବିଶ୍ୱ ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ ସମ୍ମିଳନୀ ସଫଳତାର ସହ ଶେଷ ହୋଇଛି। ଏହି ସମ୍ମିଳନୀରେ ବିଶ୍ୱ ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ ବ୍ୟବସ୍ଥାକୁ ଆହୁରି ସୁଦୃଢ଼ କରିବା ପାଇଁ ୩୦ରୁ ଅଧିକ ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ ପ୍ରସ୍ତାବ ଗ୍ରହଣ କରାଯାଇଛି।
ବୈଠକରେ ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ କର୍ମୀଙ୍କ ନିଯୁକ୍ତିରେ ସ୍ୱଚ୍ଛତା ଆଣିବା ସହ ମହାମାରୀ ମୁକାବିଲା ପାଇଁ ଏକ ନୂତନ ଗ୍ଲୋବାଲ୍ ଆକ୍ସନ୍ ପ୍ଲାନ୍ (୨୦୨୬-୨୦୩୬) ପ୍ରସ୍ତୁତ କରାଯାଇଛି। ଏହା ସହ ଷ୍ଟ୍ରୋକ୍, ଯକ୍ଷ୍ମା (ଟିବି) ଓ ଆଣ୍ଟିମାଇକ୍ରୋବିଆଲ୍ ପ୍ରତିରୋଧ (AMR) ଭଳି ଗମ୍ଭୀର ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ ସମସ୍ୟାର ମୁକାବିଲା ଉପରେ ମଧ୍ୟ ବିଶେଷ ଗୁରୁତ୍ୱ ଦିଆଯାଇଛି।
ସମ୍ମିଳନୀର ସମାପ୍ତି ଅବସରରେ WHO ମୁଖ୍ୟ ଡାକ୍ତର ଟେଡ୍ରୋସ୍ ଅଧାନମ୍ କହିଛନ୍ତି ଯେ, ନିଷ୍ପତ୍ତିଗୁଡ଼ିକ ସାଧାରଣ ଲୋକ ଏବଂ ଗ୍ରାମୀଣ ସ୍ତରର ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ କେନ୍ଦ୍ର ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ପହଞ୍ଚିଲେ ହିଁ ବିଶ୍ୱ ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ ସୁରକ୍ଷାର ପ୍ରକୃତ ସଫଳତା ମିଳିବ। ବିଶ୍ୱସ୍ତରରେ ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ ସେବାକୁ ଆହୁରି ସୁଦୃଢ଼ କରିବା ପାଇଁ ସମସ୍ତ ଦେଶକୁ ମିଳିତ ଭାବେ କାମ କରିବାକୁ ସେ ଆହ୍ୱାନ କରିଛନ୍ତି।

